नागपुर न्यूज डेस्क: महाशिवरात्रि पर शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, 'हर हर महादेव' और 'बम बम भोले' के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया। पारशिवनी तहसील में स्थित घोगरा महादेव मंदिर, जो करीब 1000 साल पुराना माना जाता है, श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बना रहा। किंवदंतियों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण या तो महाभारतकाल में पांडवों द्वारा किया गया था या सातवाहन राजवंश के दौरान इसे बनाया गया। घोगरा महादेव सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां 26 से 28 फरवरी तक यात्रा आयोजित की गई, जिसमें हजारों भक्त पहुंचे।
नागपुर और उसके आसपास महाभारतकालीन शिव मंदिरों से लेकर नागवंशी साधुओं द्वारा स्थापित सैकड़ों साल पुराने मंदिर स्थित हैं। ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के कारण ये मंदिर शिव भक्तों के लिए तीर्थस्थल बन गए हैं। हर साल महाशिवरात्रि पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है और श्रद्धालुओं का विशाल सैलाब उमड़ता है। मेहंदीबाग पुल के पास स्थित नागा शिव मंदिर करीब 300 साल पुराना है, जिसे नागवंशी साधुओं ने बनवाया था। मंदिर परिसर में एक नागा साधु की समाधि भी है, जो इसे और भी पवित्र स्थान बनाती है। वर्तमान में इस मंदिर का संचालन राजू येलेकर, दशरथ कालमेक, दिनेश गावांडे, प्रवीण चौधरी और मोहन लांजेवार कर रहे हैं।
बजेरिया इलाके में नन्नूमल बिल्डिंग के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर 1868 में स्थापित हुआ था। इस मंदिर में शिवलिंग के साथ नंदी देवता भी स्थापित हैं। पुराने समय में यह मंदिर भक्त गेंदालाल शाहू और गणपत गजोधर परदेशी की देखरेख में था। बाद में प्रेमलाल प्रयाग शाहू ने मंदिर को दान में दिया। सन 2019 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसके बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में 26 फरवरी से मंदिर में शिव महापुराण संगीतमय कथा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है, जहां भक्त बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।
एम्प्रेस मिल रोड स्थित श्री रामेश्वर धाम शिव मंदिर लगभग 140 साल पुराना है। यह मंदिर पहले टाटा की एम्प्रेस मिल के परिसर में स्थित था, लेकिन मिल बंद होने के बाद यह जगह महाराष्ट्र सरकार द्वारा बेच दी गई थी। वर्षों तक यह इलाका वीरान पड़ा रहा, लेकिन शिवभक्त सुखराम महाराज ने यहां रोज़ शिवजी की पूजा-अर्चना शुरू की, जिससे मंदिर फिर से जीवंत हो गया। कहा जाता है कि इस मंदिर के पास नाग-नागिन का एक जोड़ा शिवलिंग के दर्शन के लिए आता था, जिससे इसकी मान्यता और भी बढ़ गई। मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद अब यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं और शिव आराधना करते हैं।